
राष्ट्रीय मार्ग पर मवेशियों का आतंक, प्रशासन मौन – कब तक हादसों की बलि चढ़ेगी जनता?
कबीरधाम। राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलेआम गाय-भैंसों का डेरा आम जनता की जान पर भारी पड़ रहा है। सड़क पर बैठे या अचानक दौड़ पड़ने वाले मवेशियों की वजह से आये दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। बावजूद इसके प्रशासन और संबंधित विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं। सवाल उठता है कि आखिर कब तक आम जनता अपनी जान जोखिम में डालती रहेगी?
राहगीरों का कहना है कि दोपहिया वाहन चालक और स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं। कई बार बड़े ट्रक और बसें भी अचानक ब्रेक लगने से पलटने की स्थिति में आ जाती हैं। हादसे तो रोज़मर्रा की बात हो चुके हैं, मगर प्रशासन की लापरवाही के चलते स्थिति जस की तस है।
लोगों का आरोप है कि पशु मालिक जानबूझकर अपने मवेशियों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। यह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है बल्कि जनता की जान से खिलवाड़ भी है।
पशु क्रूरता अधिनियम और मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार दुर्घटना की स्थिति में सीधे पशु मालिक पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक किसी पर भी ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से माँग कि है यदि जल्द ही मवेशियों को नियंत्रित करने और पशु मालिकों पर जुर्माना लगाने जैसे सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क पर चलना और भी खतरनाक हो जाएगा।
आम जनता का सवाल बिल्कुल सीधा है – क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तब जाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?





