बोड़ला तहसील कार्यालय में आवेदकों को महीनों से चक्कर लगाने का आरोप
स्थल निरीक्षण के नाम पर लंबित रखी जा रही फाइलें, आवेदकों ने कलेक्टर और आयुक्त से जांच की मांग की

बोड़ला तहसील कार्यालय में आवेदकों को महीनों से चक्कर लगाने का आरोप
स्थल निरीक्षण के नाम पर लंबित रखी जा रही फाइलें, आवेदकों ने कलेक्टर और आयुक्त से जांच की मांग की
बोड़ला। बोड़ला तहसील कार्यालय में राजस्व संबंधी मामलों को लेकर आवेदकों को लंबे समय से कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आवेदकों का आरोप है कि स्थल निरीक्षण के नाम पर उनकी फाइलों को लगातार लंबित रखा जा रहा है। कई मामलों में करीब 8 माह बीत जाने के बाद भी फाइलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
आवेदकों का कहना है कि उन्हें बार-बार स्थल निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया पूरी होने का हवाला देकर कार्यालय बुलाया जाता है, लेकिन लंबे समय बाद भी जांच प्रतिवेदन तैयार नहीं होने से उनके प्रकरण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
वहीं, आवेदकों ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली या रसूखदार लोगों से जुड़े कुछ प्रकरणों में अपेक्षाकृत कम समय में जांच प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर कार्यालय भेजे गए। इससे लंबित प्रकरणों के आवेदकों में नाराजगी है और वे जांच प्रक्रिया में समानता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आवेदकों का यह भी आरोप है कि तहसील कार्यालय से भेजे गए कुछ जांच प्रतिवेदन निर्धारित जांच बिंदुओं से अलग बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे प्रतिवेदनों की भी उच्च स्तर पर जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
तहसील कार्यालय के लगातार चक्कर काट रहे आवेदकों ने कलेक्टर एवं संभागीय आयुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच में अनियमितता पाए जाने पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
आवेदकों का कहना है कि राजस्व मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और सभी आवेदकों के साथ समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से महीनों तक कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।





